आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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कैप्टन हनीफ उद्दीन, वीर चक्र (मरणोपरांत) दिल्ली के रहने वाले थे और उनका जन्म 23 अगस्त 1974 को हुआ था। 1996 में स्नातक होने के बाद भारतीय सैन्य अकादमी में भर्ती हुए और 7 जून, 1997 को उन्हें भारतीय सेना की लॉजिस्टिक शाखा, आर्मी सर्विस कोर में नियुक्त किया गया।बाद में उन्हें 11 राज रिफ़ बटालियन में तैनात किया गया जो कारगिल में तैनात थी। 06 जून 1999 को अपनी वांछित स्थिति पर कब्ज़ा करने के लिए आगे बढ़े,उन्हें दुश्मन ने देख लिया और उन पर गोलीबारी कर दी। भीषण गोलीबारी में वे घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन हनीफ उद्दीन को उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व और उच्च कोटि के सौहार्द का प्रदर्शन करने के लिए वीरता पुरस्कार, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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लेफ्टिनेंट कर्नल अंबरीश राय का जन्म 01 मार्च 1977 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के बैरकपुर गांव में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्टिलरी रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । वर्ष 2016 के दौरान उनकी यूनिट 821 लाइट रेजिमेंट ऑपरेशन मेघदूत के हिस्से के रूप में जम्मू-कश्मीर के सियाचिन क्षेत्र में तैनात थी । 06 जून 2016 को लेफ्टिनेंट कर्नल अंबरीश राय ड्यूटी पर थे तभी अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए पास की सैन्य चिकित्सा सुविधा में ले जाया गया परन्तु ऑक्सीजन की भारी कमी और शून्य से नीचे तापमान के कारण वे शहीद हो गए। लेफ्टिनेंट कर्नल अंबरीश राय एक प्रतिबद्ध सैनिक और पेशेवर रूप से सक्षम अधिकारी थे जिन्होंने भारतीय सेना की उच्चतम परंपराओं का पालन करते हुए देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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NB SUB MANGEJ SINGH- VrC स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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RFN PARVESH KUMAR स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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मेजर डेविड मनलुन"कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के रहने वाले थे और उनका जन्म 27 जुलाई 1985 को इम्फाल, मणिपुर में हुआ था। मार्च 2010 में उन्हें नागा रेजिमेंट की पहली बटालियन में भर्ती किया गया। बाद में उन्हें 2014 में 164 इन्फेंट्री बटालियन (टी ए) के साथ नागालैंड में तैनात किया गया था। उनकी बटालियन ने 06 जून 2017 को एक संयुक्त अभियान शुरू करने का फैसला किया जिसका मेजर डेविड नेतृत्व कर रहे थे। आतंकवादी भारी हथियारों से लैस थे और स्वचालित हथियारों और ग्रेनेड का इस्तेमाल कर रहे थे। भीषण युद्ध हुआ जिसके दौरान मेजर डेविड घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर डेविड मैनलुन को उनके उत्कृष्ट धैर्य, दृढ़ संकल्प, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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सेकंड लेफ्टिनेंट रमेश रावत 1 /11 गोरखा राइफल्स (बटालिक) में भर्ती हुए। 06 जून 1989 को ऑपरेशन पवन के दौरान लिट्टे आतंकवादियों से वीरतापूर्वक लड़ते हुए देश के लिए उन्होंने अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। इन बहादुर अधिकारी को उनके अदम्य साहस और अदम्य टीम भावना के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
मेजर संजीत चौधरी बिहार के बेगुसराय जिले के राजापुर गांव के रहने वाले थे और उनका जन्म 06 जून 1965 को हुआ था। 5 जून 1986 को वे सेना में भर्ती हुए और उन्हें 13 गढ़वाल राइफल्स में नियुक्त किया गया। 1997 के दौरान मेजर संजीत चौधरी की यूनिट "ऑपरेशन रक्षक" के हिस्से के रूप में कश्मीर घाटी में तैनात थी। खुफिया सूत्रों के आधार पर मेजर संजीत चौधरी को 31 अक्टूबर 1997 को आतंकवाद विरोधी अभियान का काम सौंपा गया था। जब वे और उनके साथी नियोजित गश्ती मार्ग से गुजर रहे थे तभी एक बड़ा आईईडी विस्फोट हुआ जिसमें मेजर संजीत चौधरी घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







