आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1918-05-20 |
| Martyr | Battle Casualty |
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत, परमवीर चक स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1933-07-18 |
| Martyr | Battle Casualty |
फ्लाइट लेफ्टिनेंट जगन नाथ विजयराघवन ,कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 18 जुलाई 1933 को हुआ था। उन्हें 01 अप्रैल 1953 को भारतीय वायु सेना की उड़ान शाखा में कमीशन मिलाऔर एक लड़ाकू पायलट के रूप में अपनी पहचान बनाई। 14 मई 1962 को अभ्यास के दौरान उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हो गए । फ्लाइट लेफ्टिनेंट जगन नाथ विजयराघवन को उनकी बहादुरी, पेशेवर क्षमता, सौहार्द और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
| DOB | 1961-07-18 |
| Martyr | Battle Casualty |
कर्नल कंवर जयदीप सिंह सलारिया शौर्य चक्र* (मरणोपरांत), सेना मैडल का जन्म 18 जुलाई 1961 को पंजाब के पंगोली गांव में हुआ था। 1983 में वे एक अधिकारी के रूप में पास आउट हुए और उन्हें 5 डोगरा रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। एक मेजर के रूप में उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियान में वीरता के लिए 1997 में उन्हें "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गया और उसके बाद उनकी गहरी प्रतिबद्धता और सैन्य नेतृत्व कौशल के लिए उन्हें "सेना पदक" से भी सम्मानित किया गया। कर्नल कंवर जयदीप सिंह ने मार्च 2002 में 6 डोगरा के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में पदभार संभाला जो यूनिट राजौरी जिले के आतंकवादी प्रभावित क्षेत्र में तैनात थी। 18 अगस्त 2002 को यूनिट के टोही गश्ती दल की जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में सशस्त्र घुसपैठियों के एक समूह से मुठभेड़ हो गई। जिसमे भीषण गोलीबारी हुए। इसी दौरान कर्नल कंवर जयदीप सिंह सलारिया घायल हुए और बाद में शहीद हो गए। कर्नल कंवर जयदीप सिंह सलारिया को उनकी वीरता, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए दूसरी बार वीरता पुरस्कार, "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से कर्नल कंवर जयदीप सिंह सलारिया, शौर्य चक्र* (मरणोपरांत), सेना मैडल को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







