सूबेदार निहाल सिंह, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) भारतीय सेना की 9 जाट रेजिमेंट के एक बहादुर अधिकारी थे। 1990 के दशक के मध्य में जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठ और सीमा पार से आतंकवाद चरम पर था। आतंकियों के सफाए और नियंत्रण रेखा (LoC) की सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन रक्षक' चलाया जिसका वे हिस्सा थे। उनकी यूनिट नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे गुरेज सेक्टर में तैनात थी। 24 अगस्त 1996 को उनकी टुकड़ी को सीमा पार से भारी हथियारों से लैस आतंकियों के एक समूह द्वारा घुसपैठ करने की खुफिया जानकारी मिली। आतंकियों को रोकने के लिए चलाए गए ऑपरेशन के तहत सूबेदार निहाल सिंह ने अपनी टीम के साथ मोर्चा संभाला। अत्यधिक खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद निहाल सिंह और उनकी यूनिट ने ने आतंकियों को घेर लिया। खुद को घिरता देख आतंकियों ने सैनिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सूबेदार निहाल सिंह ने तुरंत जवाबी कार्यवाही की और अपनी टुकड़ी का आगे रहकर नेतृत्व किया। इस आमने-सामने की भीषण मुठभेड़ में सूबेदार निहाल सिंह ने कई आतंकियों को मार गिराया, लेकिन इसी दौरान उनको गोली लगी और वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए।




