लेफ्टिनेंट हेमन्त सिंह महर बिष्ट, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 23 अगस्त को देहरादून के पिथौरागढ़ के बिन गांव में हुआ था। 12 जून 1999 को वे भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए और उन्हें 7 गार्ड्स में नियुक्त किया गया। उन्हें यूनिट के साथ कारगिल ऑपरेशन (ऑपरेशन विजय) में नौगांव सेक्टर (जम्मू और कश्मीर) में तैनात किया गया। 19 सितंबर 2000 को लगभग 1430 बजे अग्रिम चौकियों ने सूचना दी कि चौकी के नीचे भारी संख्या में दुश्मन की गतिविधि संदिग्ध है, लेकिन कोहरे और घने पेड़ों के कारण कुछ भी स्पष्ट नहीं था। दुश्मन की उपस्थिति का पता लगाने के लिए वे तीन जवानों के साथ चौकी पर गए और बंकर की छत पर चढ़े , जहां उन्होंने देखा कि दुश्मन हमले की घात में बैठा है। उन्होंने हमले को रोकने के लिए घुसपैठिए पर भीषण गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें दो घुसपैठिए मारे गए, लेकिन खुद खुले में होने के कारण उनके साथ गए तीन जवान भी घायल हो गए। परन्तु दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और अपनी चौकी को बचा लिया गया, लेकिन इस दौरान लेफ्टिनेंट हेमंत गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट हेमन्त को अपने कर्तव्य से कहीं अधिक वीरतापूर्ण कार्यों, अदम्य साहस, अद्वितीय वीरता, दुश्मन के सामने साहसिक और अनुकरणीय नेतृत्व का प्रदर्शन करने तथा दुश्मन के हमले के खिलाफ अपनी चौकी की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने के लिए 15 अगस्त 2001 को शौर्य चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।




