राइफलमैन मोहम्मद एजाज, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद बतौर सैनिक भर्ती हुए थे। भर्ती के बाद उन्होंने JAK LI के रेजिमेंटल सेंटर में कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया, जिसके बाद उन्हें 5 JAK LI बटालियन में तैनात किया गया। वर्ष 2000 में उनकी यूनिट उत्तर-पूर्व भारत के असम राज्य में आतंकवाद विरोधी अभियानों में तैनात थी। 23 सितंबर 2000 को मिली ख़ुफ़िया जानकारी असम के एक घने जंगली इलाके में उग्रवादी भारी हथियारों के साथ छिपे हुए हैं । के आधार पर खोज और विनाश अभियान शुरू किया गया। जैसे ही यूनिट आतंकवादियों के ठिकानों के करीब पहुंची, छिपे हुए दुश्मनों ने स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। विपरीत परिस्थितियों और भारी गोलीबारी के बीच, राइफलमैन मोहम्मद व उनकी यूनिट ने तुरंत जवाबी कार्यवाही की। इस आमने-सामने की भीषण लड़ाई में राइफलमैन एजाज ने बेमिसाल सटीक निशाना साधते हुए आतंकवादियों का मुकाबला किया और उन्हें मार गिराया। हालाँकि इस दौरान उन्हें कई गोलियां लगने के कारण वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। राइफलमैन मोहम्मद एजाज को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व, सौहार्द और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।




