मेजर कुमंदुर प्रभाकर विनय का जन्म 18 मार्च 1977 को बैंगलोर में हुआ था। वे आर्टिलरी रेजिमेंट के 53 मीडियम रेजीमेंट में कार्यरत थे।
2007 के दौरान मेजर कुमंदुर प्रभाकर विनय कश्मीर घाटी के बारामूला क्षेत्र में तैनात 37 आरआर बटालियन में कार्यरत थे। 02 अक्टूबर 2007 को मेजर कुमंदुर प्रभाकर विनय को मेजर दिनेश रघु रमन के साथ बारामूला के एक गांव में छिपे आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए एक ऑपरेशन शुरू करने का काम सौंपा गया था। 2 अक्टूबर 2007 की सुबह आतंकवादियों की आवाजाही के बारे में जानकारी मिलने के बाद, मेजर विनय सैनिकों की एक टीम का नेतृत्व करते हुए बारामूला जिले के तनमर्ग की ओर रवाना हुए। जल्द ही सैनिकों ने आतंकवादियों से संपर्क किया जिन्होंने चुनौती दिए जाने पर उन पर गोलीबारी की। इसके बाद कई घंटों तक चली भीषण गोलीबारी हुई। आतंकवादियों ने घेरा तोड़कर भागने के लिए अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी लेकिन मेजर विनय और उनके सैनिकों ने ऐसे तीन प्रयासों को विफल कर दिया। इस दौरान कुल नौ उग्रवादियों को मार गिराया गया। गोलीबारी के दौरान मेजर कुमंदुर प्रभाकर विनय के सिर और छाती पर दुश्मन की गोलियाँ लगीं जिसके कारण वे वीरगति को प्राप्त हो गए। उनके अदम्य साहस, अडिग लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय एवं समस्त सुभारती परिवार द्वारा मेजर कुमंदुर प्रभाकर विनय को उनकी जयंती पर बारंबार नमन !




