क्रांतिवीर सूर्य सेन का जन्म 22 मार्च 1894 को हुआ था। वे भारत की स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रान्तिकारी थे। उन्होने इंडियन रिपब्लिकन आर्मी की स्थापना कीऔर चटगांव विद्रोह का सफल नेतृत्व किया। चटगांव के नोआपाड़ा इलाके निवासी क्रांतिवीर सूर्य सेन एक अध्यापक थे। यह घटना 18 अप्रैल 1930 से शुरू होती है जब बंगाल के चटगांव में आजादी के दीवानों ने अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने के लिए इंडियन रिपब्लिकन आर्मी (आईआरए) का गठन कर लिया।आई आर ए के गठन से पूरे बंगाल में क्रांति की ज्वाला भड़क उठी और 18 अप्रैल 1930 को सूर्य सेन के नेतृत्व में दर्जनों क्रांतिकारियों ने चटगांव के शस्त्रागार को लूट कर अंग्रेज शासन के खात्मे की घोषणा कर दी। क्रांति की ज्वाला के चलते हुकूमत के नुमाइं दे भाग गए और चटगांव में कुछ दिन के लिए अंग्रेजी शासन का अन्त हो गया। उनके एक मित्र नेत्र सेन के धोखे के कारण फरवरी 1933 में पुलिस ने आकर उन्हें पकड़ लिया। 12 जनवरी 1934 को तारकेश्वर दस्तीदार नामक एक क्रांतिकारी के साथ उनको फाँसी दे दी गई।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय एवं समस्त सुभारती परिवार द्वारा क्रांतिवीर सूर्य सेन को उनकी जयंती पर बारं बार नमन !




