कैप्टन संजय आर्य, सेना मैडल (मरणोपरांत) का जन्म 31 मार्च 1977 को हुआ था। वे बचपन से ही सैन्य वर्दी पहनने की इच्छा रखते थे। बड़े होने के दौरान उन्होंने अपने सपने का पालन करना जारी रखा और अंततः स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई में शामिल होने के लिए चुने गए। उन्हें 8 गोरखा राइफल्स की 5/8 जीआर बटालियन में नियुक्त किया गया था, जो एक पैदल सेना रेजिमेंट है जो अपने निडर सैनिकों और कई युद्ध सम्मानों के लिए प्रसिद्ध है। बहुत जल्द ही युवा लेफ्टिनेंट संजय आर्य ने फील्ड क्राफ्ट कौशल में विशेषज्ञता हासिल कर ली और एक सख्त सैनिक और अच्छे अधिकारी के रूप में विकसित हुए।
2003 तक उन्हें कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया था और जम्मू में तैनात होने के दौरान उन्होंने 11 मई 2003 को सुश्री श्यामली से शादी कर ली। इस जोड़े को वर्ष 2004 में एक बेटी रुचिका का जन्म हुआ। हालांकि नियति को कुछ और ही मंजूर था। कैप्टन संजय आर्य के लिए और वे उसी वर्ष शहीद हो गए।
2004 के दौरान कैप्टन संजय आर्य मिजोरम में तैनात 25 असम राइफल्स में प्रतिनियुक्ति पर थे। यूनिट को जिम्मेदारी का क्षेत्र मिजोरम-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ चलता था और सक्रिय उग्रवाद से प्रभावित था। चूंकि इसके एओआर में कई आतंकवादी सक्रिय थे यूनिट के सैनिकों को हर समय बहुत अधिक निगरानी रखनी पड़ती थी और कम सूचना पर ऑपरेशन करना पड़ता था। ऐसा ही एक ऑपरेशन यूनिट द्वारा 11 दिसम्बर 2004 को कैप्टन संजय आर्य के नेतृत्व में किया गया ।
11 दिसम्बर 2004 को कैप्टन संजय आर्य ने मिजोरम के चम्फाई जिले के वाफई गांव में विद्रोहियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर एक तलाशी अभियान का नेतृत्व किया। जैसे ही कैप्टन संजय आर्य और उनके सैनिक संदिग्ध क्षेत्र में पहुंचे और ऑपरेशन शुरू किया उन पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। इसके बाद भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। कैप्टन संजय आर्य ने आतंकवादियों के भागने के मार्गों को अवरुद्ध करने के लिए अपने लोगों का उपयोग करते हुए सामने से हमले का नेतृत्व किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान कैप्टन संजय आर्य को कई गोलियां लगीं और वे शहीद हो गए। कैप्टन संजय आर्य एक प्रतिबद्ध सैनिक और साहसी अधिकारी थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी वीरता, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार "सेना मैडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
कैप्टन संजय आर्य की पत्नी, श्रीमती श्यामली बाद में अपने पति के नक्शेकदम पर चलीं और वर्ष 2005 में सेना में शामिल हो गईं। कैप्टन संजय आर्य, सेना मैडल (मरणोपरांत) के परिवार में उनकी मां श्रीमती आमेर देवी, पत्नी लेफ्टिनेंट कर्नल श्यामली और बेटी रुचिका हैं।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से कैप्टन संजय आर्य, सेना मैडल (मरणोपरांत) को उनकी
जयंती पर बारंबार नमन !




