मेजर दिनेश रघु रमन, अशोक चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 06 अप्रैल 1978 को हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 19 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। अपनी यूनिट के साथ कुछ वर्षों तक सेवा करने के बाद मेजर रमन को वर्ष 2006 के दौरान जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में 34 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया । जून 2007 में मेजर रमन ने एक बहुत ही सफल ऑपरेशन "ऑपरेशन नरवर" चलाया जिसका समापन हुआ। वे अपनी जिम्मेदारी के क्षेत्र में 3 कट्टर आतंकवादियों को खत्म करने में कामयाब रहे। 02 अक्टूबर 2007 को मेजर रमन को बारामूला के एक गांव में छिपे आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए एक ऑपरेशन शुरू करने का काम सौंपा गया। उस दिन सुबह 0820 बजे मेजर रमन ने संदिग्ध क्षेत्र की घेराबंदी करने के लिए अपनी कंपनी तैनात की। लगभग 0855 बजे संदिग्ध घरों में खोज अभियान के दौरान मेजर रमन ने एक साथी अधिकारी की चीखें सुनीं जो गोलीबारी के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया था। मेजर रमन ने तुरंत स्थिति का विश्लेषण किया और अपने साथी अधिकारी को बचाने के लिए उस दिशा में आगे बढ़े। उच्चतम स्तर के सौहार्द भावना का प्रदर्शन करते हुए वे भारी गोलीबारी के बीच घायल अधिकारी की ओर रेंगते रहे। इसके बाद उन्होंने उसे और दो अन्य घायल सैनिकों को सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया। इसके बाद वे उन दो आतंकवादियों की ओर बढ़े जिन्होंने सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचाया था और एक भीषण नजदीकी लड़ाई में उन दोनों को गोली मार दी। पास के घर में और भी आतंकी छिपे हुए थे जिन्होंने मेजर रमन पर फायरिंग कर दी इससे गोलीबारी का एक और मोर्चा खुल गया और गोलीबारी के दौरान मेजर रमन गंभीर रूप से घायल हो गए। निडर होकर उन्होंने अपने सैनिकों का नेतृत्व और उत्साहवर्धन जारी रखा और आतंकवादियों के ऊपर तब तक आक्रमण जारी रखा जब तक वे स्वयं बेहोश नहीं हो गए। मेजर रमन को हवाई मार्ग से श्रीनगर के सैन्य अस्पताल ले जाया गया जहां वे वीरगति को प्राप्त हो गए।
मेजर दिनेश रघु रमन को उनके असाधारण साहस, सौहार्द, लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से मेजर दिनेश रघु रमन, अशोक चक्र (मरणोपरांत) को उनकी जयंती पर बारंबार नमन !




