लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह, अशोक चक्र (मरणोपरांत) का जन्म पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था। 2010 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सेना आयुध कोर में नियुक्त किया गया और उनको पहली पोस्टिंग 15 मराठा लाइट इन्फैंट्री में मिली जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू और कश्मीर में तैनात थी। 2011 के दौरान लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह की यूनिट उत्तरी कश्मीर के गुरेज सेक्टर में तैनात थी । 19 अगस्त 2011 को लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह के नेतृत्व में घातक प्लाटून को खूंखार आतंकवादियों को रोकने और खत्म करने का काम सौंपा गया। उन्होंने सामने से नेतृत्व करते हुए आतंवादियों पर हमला कर दिया। इस ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम ने 12 आतंकवादियों को मार गिराया लेकिन लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह खुद गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह को उनके असाधारण साहस, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह, अशोक चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !




