लांस नायक गुरदेव सिंह का जन्म पंजाब के बोपाराय बाज सिंह गांव में हुआ था । वह श्री मेहर सिंह के पुत्र थे। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारतीय सेना में शामिल हुए और उन्हें 5 सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2015 के दौरान वे जम्मू एंड कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में
6 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे जो यूनिट नियमित आधार पर आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में लगी थी । 04 अक्टूबर 2015 को खुफिया सूत्रों से श्रीनगर से 85 किमी उत्तर पश्चिम में हंदवाड़ा के घने हफरुदा जंगलों में कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिली। परिणामस्वरूप आतंकवादियों को पकड़ने के लिए सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया। सेना की 6 राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने संदिग्ध क्षेत्र की घेराबंदी की और आतंकवादियों को देखा। हालांकि उग्रवादियों ने घने जंगल का फायदा उठाकर सुरक्षा बलों को चकमा दे दिया।
उग्रवादी समूह बाद में विशाल हफरुदा जंगलों में बिखर गया। घने जंगलों और जंगल में घनी झाड़ियों ने इसे वर्षों से आतंकवादियों के लिए पसंदीदा ठिकाना बना दिया था । लेकिन सैनिकों ने आतंकवादियों की तलाश में इलाके की तलाशी जारी रखी क्योंकि उनके भागने के रास्ते अवरुद्ध हो गए थे। जब सैनिकों द्वारा तलाशी अभियान जारी था, तो रणनीतिक स्थानों पर छिपे आतंकवादियों ने सैनिकों के काफिले पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद भारी गोलीबारी शुरू हुई । उग्रवादी भारी मात्रा में स्वचालित हथियारों से लैस थे और अंधेरे और घने जंगल की आड़ में लाभ की स्थिति से गोलीबारी कर रहे थे। गोलीबारी के दौरान लांस नायक गुरदेव सिंह ओर लांस नायक बोट्टा सत्यम गंभीर रूप से घायल हुए ओर बाद में शहीद हो गए। लांस नायक गुरदेव सिंह एक बहादुर और समर्पित सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपना जीवन लगा दिया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से लांस नायक गुरदेव सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !
लांस नायक गुरदेव सिंह के परिवार में उनके पिता मेहर सिंह, भाई मेजर सिंह और बहन गुरिंदर कौर, पत्नी राजबीर कौर और बेटी अवनीत और बेटा लक्षदीप हैं।




