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हवलदार पी.के कमलासनन का जन्म 08 दिसम्बर 1959 को केरल के पथानामथिट्टा जिले के नारंगनम गांव में हुआ था।  04 नवम्बर 1979 को वे सेना में शमिल हुए और उन्हें 12 मद्रास रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । वर्ष 1987 में हवलदार कमलासनन की यूनिट को आई पी के ऍफ़  के हिस्से के रूप में श्रीलंका भेजा गया।

लिट्टे से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति तैयार करने के बाद आई पी के ऍफ़ ने 09 अक्टूबर 1987 को अपना पहला ऑपरेशन शुरू किया। कोड नाम ऑपरेशन पवन से उम्मीद थी कि यह जाफना और उसके आसपास लिट्टे की संचालन क्षमता को बेअसर कर देगा। इसमें लिट्टे की कमान की श्रृंखला पर कब्जा करना या उसे बेअसर करना शामिल था। जिससे आई पी के ऍफ़  द्वारा लिट्टे  के गढ़ों पर आसन्न हमले के सामने विद्रोही आंदोलन को दिशाहीन छोड़ने की उम्मीद थी। अंततः दो सप्ताह की भयंकर लड़ाई के बाद आई पी के ऍफ़ ने लिट्टे  से जाफना और अन्य प्रमुख शहरों का नियंत्रण छीन लिया लेकिन जाफना किले पर कब्जे के लिए ऑपरेशन जारी रहा।

04 नवंबर 1987 को हवलदार कमलासनन की यूनिट को लिट्टे उग्रवादियों के संदिग्ध ठिकाने पर तलाशी अभियान शुरू करने का काम सौंपा गया था। हवलदार कमलासनन नम्बर 2 बैच के टीम हवलदार थे जो चावकचेरी - सवासलाई - मीसलाई रोड पर तलाशी अभियान के लिए गए थे। जब टीम लगभग 1235 बजे मीसलाई इलाके में सड़क जंक्शन के पास पहुंची, तो उग्रवादियों ने सड़क के पूर्व में घरों से एक हिस्से पर गोलीबारी की। यह उग्रवादियों द्वारा टीम के हिस्से पर एक पूर्व नियोजित और अच्छी तरह से समन्वित हमला था और इसने उन्हें घेर लिया।

हवलदार कमलासनन ने दो आतंकवादियों को देखा जो टीम पर प्रभावी गोलीबारी कर रहे थे। उन्होंने महसूस किया कि अपने साथियों को बचाने और यूनिट के सौंपे गए कार्य को जारी रखने के लिए किसी तरह दो आतंकवादियों को निष्प्रभावी करना होगा। हवलदार कमलासनन ने अपनी जान की परवाह किए बिना साहस का परिचय देते हुए अपनी राइफल से गोलीबारी कर रहे आतंकवादियों पर हमला किया। इस दुस्साहस से दंग रह गए आतंकवादी घबरा गए और अपनी स्थिति छोड़कर भागने से पहले अंधाधुंध गोलीबारी करने लगे। हवलदार कमलासनन की इस कार्रवाई ने उनके साथियों को आतंकवादियों की गोलीबारी से बचाया और उन्हें फिर से संगठित होकर आतंकवादियों पर हमला करने के लिए महत्वपूर्ण समय दिया। परन्तु गोलीबारी में हवलदार कमलासनन के पेट में दो गोलियां लगीं और वे शहीद हो गए।

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से हवलदार पी.के. कमलासनन  को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !

 

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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

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