सिपाही गुरुसेवक सिंह का जन्म पंजाब के तरनतारन जिले के वाराना गांव में हुआ था। सिपाही गुरुसेवक की दो बहनें और एक बड़ा भाई था। 2013 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 22 सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया ।
2016 के दौरान सिपाही गुरुसेवक सिंह की यूनिट को जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर तैनात किया गया । भारत की पाकिस्तान के साथ करीब 3000 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है जिसमें 740 किलोमीटर एलओसी जम्मू-कश्मीर में आती है। एलओसी अत्यधिक सक्रिय और अस्थिर है जहां अक्सर सीमा पार से गोलीबारी होती रहती है।
06 नवम्बर 2016 को सेना के सतर्क जवानों ने आधी रात के आसपास कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखीं और घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों को चुनौती दी। आतंकवादियों ने गोलीबारी की और एलओसी के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की ओर वापस घुसने की कोशिश की। आगामी गोलीबारी में सिपाही गुरुसेवक सिंह और एक अन्य सैनिक को गोली लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हुए और 07 नवम्बर 2016 को सिपाही गुरुसेवक सिंह शहीद हो गए। सिपाही गुरुसेवक सिंह ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए ।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से सिपाही गुरुसेवक सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !
सिपाही गुरुसेवक सिंह के परिवार में उनके पिता बलविंदर सिंह, मां बलजीत कौर और बड़े भाई जसबीर सिंह हैं।




