मेजर कुणाल मुन्नदिर गोसावी, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर में हुआ था । मेजर कुणाल ने अपनी स्कूली शिक्षा पंढरपुर के कावथेकर हाई स्कूल से की और पुणे के बृहन् महाराष्ट्र कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। मेजर कुणाल को बचपन से ही सशस्त्र बलों में शामिल होने की तीव्र इच्छा थी। उन्होंने सपने को संजोना जारी रखा और स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद सेना में शामिल होने के लिए संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित हो गए।
2006 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्टिलरी रेजिमेंट की 166 मीडियम रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। कुछ वर्षों तक सेवा करने के बाद, उन्होंने 2009 में मिस उमा से शादी कर ली और दंपति की एक बेटी उमंग थी। 2013-14 के दौरान मेजर कुणाल ने संकटग्रस्त मणिपुर क्षेत्र में सेवा की और कई उग्रवाद विरोधी अभियानों का हिस्सा रहे।
नवम्बर 2016 के दौरान मेजर कुणाल जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में स्थित 116 मीडियम रेजिमेंट में कार्यरत थे। 29 नवम्बर के दुर्भाग्यपूर्ण दिन भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह ने नगरोटा में सुबह लगभग 5.30 बजे उनकी आर्टिलरी यूनिट पर हमला किया और चार सैनिकों को मार डाला। इसके बाद आतंकवादी अधिक जनहानि करने के प्रयास में दो आवासीय भवनों में घुस गए। तीन आतंकवादियों ने दो आवासीय भवनों पर कब्जा कर लिया, जिनमें अधिकारियों के परिवार और एक मेस रहते थे। हमले की सूचना मिलते ही मेजर कुणाल तुरंत हरकत में आए और यूनिट की क्यूआरटी को सक्रिय कर दिया। टीम का नेतृत्व करते हुए मेजर कुणाल घटनास्थल पर पहुंचे और घायल सैनिकों और परिवार के सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। आवासीय क्षेत्र में सैनिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए मेजर कुणाल और उनके सैनिकों ने क्षेत्र की घेराबंदी कर दी। इस बीच पास के 51 इंजीनियरिंग रेजट के मेजर अक्षय गिरीश कुमार और उनकी यूनिट की क्यूआरटी भी साइट पर पहुंच गई। सेना को सहयोग देने के लिए सीआरपीएफ के जवान भी घटनास्थल पर पहुंचे।
हालांकि गोलीबारी के दौरान मेजर कुणाल को गोली लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। लेकिन वे निडर होकर अपने सैनिकों को आतंकवादियों से लड़ने का निर्देश देते रहे। इसके बाद मेजर कुणाल को सीआरपीएफ के बंकर में ले जाया गया और फिर एम्बुलेंस में शिफ्ट कर दिया गया। हालाँकि अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मेजर कुणाल शहीद हो गए। मेजर कुणाल गोसावी और उनकी टीम ने न केवल आतंकवादियों से मुकाबला किया और आतंकवादियों को बंधक बनाने और निर्दोष लोगों का नरसंहार करने के नापाक मंसूबों को रोका बल्कि उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि आतंकवादी शिविर क्षेत्र में फैल न सकें और महत्वपूर्ण सैन्य संपत्तियों को नुकसान न पहुंचा सकें।
हालांकि ऑपरेशन के दौरान मेजर कुणाल गोसावी के अलावा छह अन्य सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया जिसमें मेजर अक्षय गिरीश, हवलदार सुखराज सिंह, नायक चितरंजन देबबर्मा, लांस नायक कदम संभाजी यशवंतराव, ग्रेनेडियर राघवेंद्र सिंह और राइफलमैन असिन राय शामिल थे। मेजर कुणाल गोसावी एक वीर सैनिक और एक साहसी अधिकारी थे जो एक अच्छे सैन्य नेता की तरह आगे बढ़कर नेतृत्व करते थे। उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से मेजर कुणाल मुन्नदिर गोसावी को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !
मेजर कुणाल मुन्नादिर गोसावी के परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती उमा गोसावी और बेटी उमंग हैं।




